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जीन ट्विकिंग से प्रवाल भित्तियों को मिलेगा जीवनदान | Gene tweaking will give life to coral reefs

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कोरल रीव्स या प्रवाल भित्तियों को वैश्विक गर्मी और समुद्री जल के अम्लीकरण से बचाने के लिए फ्लोरिडा के अध्ययनकर्ता जोर आजमाइश कर रहे हैं। वे प्रयोगशाला में ही कोरल की जेनेटिक डेटा में कुछ बाहरी जीव प्रविष्ट करके उन्हें वर्तमान में जलवायु अनुकूल बनाने की कोशिश में लगे हैं। शोध-दल ने मियामी विश्वविद्यालय की प्रो. निक्की ट्रेलर-नोल्स के नेतृत्व में इन प्रवालों में प्रतिरोधी किस्मों से स्टेम सेल का प्रत्यारोपण किया है, जो इनके लिए जलवायु प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।

प्रवाल भित्तियों को बचाने की चिंता मरीन लाइफ पर काम करने वाले शोधार्थियों और संरक्षणकर्ताओं को विशेष रूप से है क्योंकि महासागर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से 90 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त गर्मी को अवशोषित करते हैं, जिनसे भूमि की सतहें बच जाती हैं, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रियाओं से हीट वेव्स (समुद्री गर्मी) पैदा होती है, जो प्रवाल भित्तियों के लिए प्रतिकूल वातावरण पैदा करती है।

ग्लोबल वार्मिंग की चिंता इस बिंदु पर पहुंच गई है कि वैज्ञानिक कुछ जीवों के आनुवंशिकी को बदलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे जीवित रह सकें। कोरल पर काम कर रहे मियामी विश्वविद्यालय की टीम की प्रमुख निक्की ट्रेयलर-नोल्स ने बताया, *रीफ्स बहुत ही खतरनाक रफ्तार से खत्म हो रहे हैं और वे जलवायु परिवर्तन को बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं। इस बिंदु पर, हमें उन्हें बचाने की कोशिश करनी है और इस दिशा में उनको बचाने के लिए कौन सा उपाय कारगर होता है, ये भी देखना है।

इस शोध को फ्लोरिडा अनुसंधान, सैन फ्रांसिस्को के पास स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था - रिवाइव एंड रिस्टोर द्वारा समर्थन दिया जा रहा है। ये संस्था पौधों और जानवरों को विनाश से बचाने के लिए काम कर रहे संरक्षणवादियों के लिए आनुवंशिक इंजीनियरिंग को एक मूल्यवान उपकरण के रूप में देखती है। इस संस्था के सह-संस्थापक रयान फेलन ने कैलिफोर्निया के एक सम्मेलन में बताया था कि हमारे पास प्रजातियों को इस तरह के अनुकूलन में मदद करने के लिए विकासवादी समय (एवोल्युशनरी टाइम) नहीं है। हमें हस्तक्षेप करना होगा या फिर हमें इसे (कोरल को) जाने देना होगा।

पृथ्वी पर जीव लंबे समय तक धीरे-धीरे विकसित होकर या उन जगहों पर जाकर जीवित रहे हैं, जहां भूमि, आवास या तापमान अधिक अनुकूल है। इस बिंदु को लक्ष्य करते हुए शोधार्थी  प्रवाल भित्तियों पर अनुसंधान करते हुए उन्हें प्रयोगशाला के पर्यावरण अनुकूल सिस्टम में रख रहे हैं और उनमें तेजी से हो रहे बदलावों पर माइक्रोस्कोप से निगरानी रख रहे हैं, फ्लोरिडा के प्रवाल भित्तियों को पुनर्स्थापित करने के इस अध्ययन के नतीजों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

रोचक जानकारी

ग्लोबल कोरल रीफ मॉनिटरिंग नेटवर्क के अब तक के सबसे बड़े एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रदूषण और डायनामाइट फिशिंग पद्धति के साथ, ग्लोबल वार्मिंग ने 2009 और 2018 के बीच दुनिया के 14 प्रतिशत प्रवाल भित्तियों का सफाया कर दिया है।

somadri
पुराने ब्लॉग-पोस्टों को नवीनतम रूप दिया जा रहा है, जो मेरे विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समर्पित पोर्टल *सोम-रस* पढ़े जा सकेंगे। Study Observes Mysteries- Research Accelerates Science का संक्षिप्तीकरण है SOM-RAS, जिसकी अवधारणा 2007 में की गई थी, थोड़ा-बहुत लिखना भी हुआ, बाकी अभी भी डायरी के पन्नों में सिमटा हुआ है, डिजाइन से लेकर कंटेंट संयोजन तक। पुराने पोस्ट में मनो-विज्ञान से संबंधित अनुभवों और संस्मरण लिखती रही। नियमित लेखन नहीं हो सका, कुछ समयाभाव में , तो कुछ आलस में। पराने पोस्ट नए कलेवर में सोम-रस के सब-डोमेन में उपलब्ध होंगे। मेरा विज्ञान और साहित्य के प्रति नैसर्गिक झुकाव रहा है। संक्षेप में, मैं हूँ पेशे से पत्रकार, पसंद के अनुसार ब्लॉगर, जुनून के हिसाब से कलाकार, उत्कटता की वजह से लेखक, आवश्यकता के लिए काउंसलर | पर, दिल से परोपकारी और प्रकृति से उद्यमी हूं।

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